ईश्वर भटक गया है : एक आस्तिक की डायरी से ————————-••——————— ईश्वर 'तू' भटक गया है इस भीड़ में तू अकेला है खुद रास्ता ढूँढ सके तो ढूँढ ले दाँव पर है साख तेरे नाम पर भारी स्वाँग धर्मग्रँथों की व्याख्या तेरे से मेल नहीं खा रही ईश्वर 'तू' जमीन कब्जानें लगा सड़कों पर 'धर्मढाबे' खुलवाने लगा 'तू' वैध है तो धर्मस्थल अवैध क्यों ईश्वर तूनें बाबाओं के पाँच सितारा आश्रम देखे तेरे बदले खुद के बुत तराश लिये 'मौन साधना' छोड़ लाउडस्पीकर पर टंगा धर्म धर्म का धँधा करते चेनल गुरुद्वारों में कर्मकाँड 'खुदा' को बेचते खुदाई खिदमतदार अल्लाह के नाम पर बम फट रहे अब 'निराकार साकार' दोनों विकृत हुए 'किताबी बेकिताबी' सब दिगम्बर हुए 'तू' जो न सँभला मिट जायेगा धर्म के खुल गये हैं ढेरों 'बिग बाज़ार' तू तो बस बाहर का 'शोकेस' है अंदर नोट गिन रहे हैं मेनेजर

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