प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी एक तू ही है इस जग में मेरा तेरे बिना है चहुँ ओऱ अंधेरा तेरा विश्वास है मेरे मन में मंगल फिर है घने जंगल में तू स्वामी सच्चा साथी मेरा तुझसे रौशन चांद औ सवेरा करुणासिन्धु न्यायप्रिये हो तुम बिन कौन हरे दुःख मेरा तुम चाहो हम वो कर पाएं दुरूह किन्तु कर पाए मन मेरा सरल नहीं रज़ा में रह पाना रखना अटल विश्वास तुम मेरा कण कण व्याप्त जगत चराचर तुम्हरी इच्छा हर श्वांस का फेरा मन वाणी कर्म निमित्त तुमको हो यही वन्दन श्री चरणों मे मेरा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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