प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी बन्धा नहीं जो किसी धर्म से जाति देश या सम्प्रदाय से सकल सृष्टि है रचना जिसकी उसने मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बनाया समय समय ज्ञान कराया अनादिकाल से जो शाश्वत है शून्य समय भी परम शक्ति थी वही शक्ति अनन्त कहलाती एक मात्र वो करता धर्ता है जिसे आध्यत्मवाद है कहते सर्वज्ञ सर्वोच्च वोध कराता मनुष्य कर्मशील एक प्राणी पाप पुण्य बन्धन में रहता एक ईश जो कर्मफलदाता अगम्य अगोचर प्रायः रहता नाम रूप और स्थान परे है सर्वत्र सूक्ष्म अंश वो रहता कर्म करे जो समर्पित होकर निःस्वार्थ भाव होकर जो रहता करे वही व्यवहार औरों से जो स्वयं को औरों से चाहता प्रथम स्थान जो दे जीवन मे रज़ा में रहूँ कोशिश करता सभी मे ईश्वर अंश समाया सभी से प्यार सदा जो करता वही ईश को प्रिय जन होता ईश उसी में सम्बोधित हो सकता प्रातः सांझ नित करुँ प्रार्थना एक नूर सभी में प्रकाशित होता सदा कृपा की दृष्टि रखना शीश चरणों मे तुम्हारे झुकता 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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