प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी असंख्य नाम और रूपो में जो सृष्टि में जाना जाता क्षेत्र काल परिस्थितियों अनुसार बागीं स्थान माना जाता सर्वज्ञ सर्वश्रेष्ठ सर्व्यापक त्रिकालदर्शी और पूर्ण अजय जो सर्वगुणसम्पन्न सर्वशक्तिमान वही एक मात्र कर्मफलदाता अनादि अनन्त अगम्य अगोचर सर्वरूप पूजा जाता जीवन मृत्यु लाभ हानि यश अपयश सफलता असफलता कोई भी क्षण किसी प्राणी जीवन का एक में ही निर्धारित करता कर्म संस्कार सुन्दर स्वरूप गन अवगुण को भरता मानव को मानव ही समझो सभी कृति एक निर्माता नेककर्म सदव्यवहार करो हर जीव से मेरा है नाता मानष तन पाया उद्देश्य को जानो क्या ईश्वर तुमसे चाहता करें व्यवहार सदा औरों से जैसे मन खुद औरों से चाहता रह आभारी श्री चरणों में जो सबका है भाग्यविधाता श्वांस श्वांस प्रभु रह पाऊँ समर्पित श्रद्धा शीश झुका जाता 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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