Skip to main content
प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
शक्ति सर्वोच्च सृष्टी निर्माता
सर्वस्व रचना वो मात्र रचयिता
जीव निर्जीव सकल चराचर
अंश उसी का व्याप्त है रहता
सृजन पालन वही संहारक
हर प्राणी से उसका है नाता
नहीं वाध्य वो नियति हेतु
प्रेम भक्ति विश्वास में रहता
नहीं ग्रन्थ स्थान में सीमित
निस्वार्थ प्रेम में वो बन्ध जाता
न्याय प्रिय किन्तु दीनदयाला
हम सबका वो भाग्य विधाता
नियम बनाकर कर्मफल देता
कृपा इच्छा से कुछ भी दे देता
नेककर्म सदव्यवहार करो सब
क्रियात्मक रूप में हमे सिखाता
करो व्यवहार वही हम सबसे
जैसे मन औरों से खुद चाहता
करें आंकलन और विश्लेषण
मनुष्य जन्म उद्देश्य क्या होता
खुद का परिचय करें स्वयं से
फिर खोजें नियंत्रणकर्ता
जिसकी इच्छा स्वांस धड़कनें
कौन पवन को शीतल करता
भू जल गगन शिखर वनस्पति
किसकी इच्छा से सागर ठहरता
अनन्त रहस्य भूगर्भ के अन्दर
कौन है जो सन्चालन करता
आओ करें हम उसकी वन्दना
जो ईश्वर दिन रात हमें देता
रहें आभारी सदा चरणों में
एक सत्य का वोध कराता
कर्म करें हम उसे समर्पित
सर्वोच्च शक्तिमान कहलाता
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
Popular posts from this blog
Comments
Post a Comment