प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी परे नाम रूप आकारा,कण कण सृष्टि जो विस्तारा नहीं विभाजित रूपों में,सिरजन पालक स्वयं संहारा एक रूप सर्वोच्च सदा ही,करे प्रमाणित भक्ति अपारा असंख्य अनन्य ब्रह्मण्डों के स्वामी,एक वही मात्र करतारा निस्वार्थ प्रेम त्याग सजा जो उसने पाया रहस्य अपारा नेककर्म सदव्यवहार करें हम,मानव श्रेष्ठ कृति अकारा हर पल यदि भान रहे तो,दूर रहे हर दोष विकारा कई बार परख की चाकी से,निकले कुन्दन बनके सुनहरा नहीं भटके जो मिथ्या जग में,कर्तव्य सत्य से करे गुजारा ज्ञान प्रकाश अनभूत अन्तस में,कर जाए भव से किनारा सत्य जोत से किया प्रकाशित,रहूँ तेरी मैं शुक्रगुजारा सतत नमन श्री चरणों में, सकल सृष्टि के सिरजनहारा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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