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जय श्री मदन जी
प्रातः वन्दन
जीव निर्जीव को रचने वाले
गति दिशा नियमन करने वाले
सर्वोच्च शक्ति का जो स्वामी
सर्वज्ञ सर्वेश्वर तू अन्तर्यामी
कण कण में रूप तुम्हारा
सकल सृष्टि का सिरजनहारा
एक मात्र सच्चा तू रहबर
त्रिकालदर्शी ओ करुणाकर
महिमा तिहारी अपरम्पार
प्यार तुम्हारा सृष्टि का सार
ज्ञान तर्क वुद्धि से परे रहे तू
सरल प्रेम में बन्ध जाए करतार
करो कृपा सदमार्ग हम पाएं
तेरी नेह शरण को हम पाएं
आदर सत्कार करें सभी का
मन से फैलाये तुम्हारा प्यार
निश्छल निर्मल हो व्यवहार
मन वाणी में बसो सरकार
प्रीत लगन अपनी ही देना
आनन्द अनुभति के रंग देना
छल कपट स्वार्थ से हो परे
इच्छा तुम्हारी हम पहचाने
उद्देश्य का मानव जीवन का
तेरी कृपा से उसको हम जाने
पथ प्रशस्त प्रभु तुम करना
आ जाये तेरी रज़ा मेंअब रहना
सांझ सवेरे हम करें वन्दना
हाथ थाम कर तुम् हमको चलाना
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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