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जय श्री मदन जी
सत्य न्याय प्रेम पर्याय जो
सकल सृष्टि का पालनहारा
कोटि कोटि ब्रह्मांडों का स्वमी
जीव निर्जीव का सिरजनहारा
सृष्टि समिष्टि रचना है जिसकी
एक वही शक्ति भवभंजनहारा
कर्मशील मानव को बनाया
एकओंकार शिव निरंकारा
हर धर्म का मूल एक ही
एक शक्ति सब मूल आधारा
कर्मप्रधान मनुष्य बनाकर
व्यवहार बनाया कर्म का सारा
हर प्राणी में है अंश उसी का
जो करता कर्म निबटारा
सर्वज्ञ सर्वोच्च शक्तिमान जो
व्याप्त सर्वत्र रूप अपारा
करें वही जो तुम् प्रभु चाहो
पाएं सदा आशीष तुम्हारा
कर्म करें जो तुम्हे समर्पित
सत्कार बने पहचान हमारा
एक नूर से हम सब उपजे
एक नूर का हम सबमें उजाला
करें प्रेम सदव्यवहार सभी से
रहें आभारी हम ईश के कृपाला
प्रातः सांझ करें नित वन्दन हम
दृष्टि रखो प्रभु हम पर दीनदयाला
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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