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देरी के लिए क्षमा
प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
उच्च शिखर पर दिनकर मुस्काया
किरणों ने भू का तिमिर मिटाया
छाई है लाली नीलगगन पर
गीत पंखुरी ने तरुवर संग गाया
प्रथम नमन सृष्टि स्वामी को
जिसने तन में प्राण जगाया
कल कल सरिता संगीत सुनाये
गीत यही कोयल ने है गाया
रहे आभारी हम सर्वोच्च शक्ति के
जिसने हमको है वोध कराया
आदर सत्कार हम करें सभी का
सदव्यवहार का नियम सिखाया
शून्य काल से अनन्त काल तक
अनादि अनन्त जो एक कहलाया
श्रद्धा भाव से शीश झुकायें
जिस कारण दिन मंगल ये पाया
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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