प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी जो कुछ निर्मित सकल सृष्टि में सर्वश्रेष्ठ मानव को है बनाया।। सबकुछ निर्मित युग्म रूप ही ईश्वर इंसान संग ही सजाया।। शून्य से भी पहले शक्ति थी प्रकृति को जिसने है सजाया।। सत्य अहिंसा अर्थ हम समझें जीव निर्जीव हैं जिसकी माया।। अंश मूक उसी परम शक्ति का मानव तन के मध्य समाया।। जो व्यवहार का करे आंकलन कर्मफल का सार बनाया।। सर्वप्रथम हम सत्य को जाने जिसने कुल सृष्टि को रचाया।। जिसका नियंत्रण जीव निर्जीव रंग बिरंगी प्रकृति को सजाया।। कोयल की कूक औ पीहू पपीहा गौरैया के सुरों ने भी गाया।। करे नमन प्रातः नित दिनकर गगन नीर संग शीश झुकाया।। सबको समझें हम अपने सा उपजी एक नूर से ही हर काया।। एक ही इष्ट है सकल चराचर एक ईश्वर ने हम सबको बनाया।। कर्मफल आधार के कारण ही भिन्न रूप और भिन्न नाम भरमाया।। प्रथम स्थान दे जीवन मे शक्ति को जिस कारण अस्तित्व है पाया।। सदा रहूँ श्री चरणों की आभारी सत्य ज्ञान का हमें वोध कराया।। प्रेम दीप मन करके प्रज्ज्वलित हमको अपनी शरण में बुलाया।। रखना प्रभु मन वुद्धि नियंत्रण भटके ना हम जग की भरमाया।। 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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