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*शास्त्रों से नहीं मिलता ज्ञान।*
*ज्ञान तो मिलता है स्वयं में प्रवेश से।*
*कितना ही जान लो कुरान और* *बाइबिल और पुराण और वेद और* *उपनिषद – नहीं कुछ होगा।*
*हां अपने को जान लोगे तो फिर कुरान में भी बहुत कुछ पाओगे, क्योंकि वह भी किसी अपने को जाने हुए आदमी की वाणी है।*
*फिर गीता में भी बहुत कुछ पाओगे।*
*मगर पहली अनुभूति तो अपने भीतर होनी चाहिए।*
*पहली किरण तो अपने भीतर टूटनी चाहिए।*
*तुम्हारे हाथ में दिया हो तो तुम्हें गीता में बहुत खजाने मिलेंगे।*
*खजाने वहां है लेकिन तुम्हारे हाथ में दिया न हों तो क्या खाक वहां पाओगे !!*
🌹🌹👁🙏👁🌹🌹
जय श्री मदन जी
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