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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
अनादि अनन्त परम् शक्ति हूँ
ज्ञान सत्य का हूँ देती
महान आत्मा ऋषयो से कभी कभी
संबोधित होती
इसीलिये समय समय पर विभिन्न नामों से जानी जाती
पूर्ण नहीं सत्य वो होता परिस्थितियाँ ही आधार होती
न्यायकारिणी सत्य रूप हूँ सदा प्रेम में हूँ रहती
सर्वज्ञ सर्व्यापक होने के कारण सदा सर्वोच्च ही रहती
प्राणाधार हूँ प्रत्येक जीव की कर्मफल निर्धारित करती
मूलभूत जीवन तत्वों को मानव हेतु निर्मित करती
नहीं रूप देवी देव भगवान का नहीं पैगम्बर होती
मैं ईश्वर अल्लाह गॉड हूँ भगवानों से पूजित होती
चाहूँ नेक कर्म ही सबसे सदव्यवहार को महत्व देती
करूँ प्यार अपनी रचना से मूक अंश मानव रहती
चेतन हुन कोई जड़ तो नहीं तेरी भक्ति प्रीत अनुभव करती
कभी कभी कर्मफल से ऊपर इच्छा प्रकट हुँ करती
सबकुछ करती अर्थपूर्ण सर्वश्रेष्ठ कृति मानव रहती
विषम वातावरण में माध्यम से प्रदर्शन भी करती
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे और गिरजा के आस्था ही रहती
मैं नहीं सीमित सीमाओं असीम ब्रह्मांडों में रहती
करती अमर प्रिय भक्तों को रूप में उनके प्रमाण देती
सोचो समझो क्यों आये भूपर
उद्देश्यों को जानो
सर्वोच्च एक है सकल सृष्टि में उसको ही कर्ता मानो
अकाल पुरुख शिव औ शक्ति अपने खुदा को पहचानो
वही एक है पूज्य सृष्टि में सत्य ज्ञान को मानो
करूँ नित्य वन्दना उसीकी सर्वभू की वन्दनीय है
साकार वही जो मेरे इष्ट हैं अंग संग उसको मानो
करो व्यवहार सदा औरों से जैसा स्वयं को चाहो
सबसे बड़ा नियम यही यदि पालन हम कर पाएं
क्षमा याचना सहित प्रभु शरण आपकी रह पाएं
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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