प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी हाथ जो विनती करूँ,विनय करूँ करि जोर हृदय सदा ही विराजियो,रख कृपा की कोर सबसे ऊपर पूज्य जो एका सर्वस्व सर्वोच्च वो त्रिलोका सदा करे कल्याण मानष का रूप नाम में जो रही प्रतीका वीर पीर देवी देव ऋषि योगी नित्य पुकारें ले नाम उचारें भू नभ जल अग्नि में व्यापक कण कण वायु में संचालक निःस्वर्थ प्रेम में जो बन्ध जावे भक्त पुकार में प्रकट हो जावे एक यही जो पूज्य सृष्टि में लेकिन भक्तन के नाम करावे कर्ता धर्ता संहारक औ हर्ता अपनी इच्छा से सृष्टि चलावे बन्धे प्रेम बन्धन में जब जब एक नया इतिहास रचावे प्रत्येक रूप में काज सँवारे भक्त को सत्य राह दिखावे नेककर्म सदव्यवहार करे जो परम् शक्ति की इच्छा वो पावे मिले लक्ष्य जीवन के उसको मन वचन कर्म से जो जन ध्यावे का काज हम आये जगत में सो पावन उद्देश्य को पावे करें वन्दना नित्य प्रातः ही दे सदवुद्धि सदमार्ग चलावे श्वांस श्वांस हम रहें आभारी वाणी सदा तेरो गुण गावे कर्म व्यवहार सब हो समर्पित तेरी इच्छा कोई तुमको पावे 🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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