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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
असीम है जो सृष्टि का निर्माता
शब्दों में कैसे विवरण दे सकता
सर्वभूवन्दनी वही सर्वरूपणी
सर्वज्ञ है सर्वशक्तिमान वो दाता
अलग अलग रूप में कर्मफल देती
परम शक्ति का हर रचना से नाता
जिसका जितना स्तर है होता
तदनुसार ही अनुभव वह पाता
कारण यही भिन्न भिन्न मत है
सत्य किसी की समझ नहीं आता
भिन्न धारणाएं भिन्न पद्धति रूप
अज्ञानता में प्रचलन हो जाता
एक ही कर्ता धर्ता और हर्ता भी
सबका मालिक एक कहलाता
सृजन पालनकर्ता और संहारक
वही रचयिता और भाग्यविधाता
न्याययधीश सर्वोच्च वही होता
करके परख प्रतिष्ठापन करता
सत्य प्यार का मात्र प्रतीक
सदव्यवहार का नियम सीखता
अविचलित रहे जो वातावरण में
स्वार्थ से ऊपर जो भी उठ पाता
पारस प्रेम से कन्चन उसे करके
विशेष सामान्य से भक्त बनाता
श्रध्दा लगन विश्वास अटल रहे
परम शक्ति का प्रिय वही होता
करे सदव्यवहार सदा सभी से
ईश प्रेम में मगन ही जो रहता
रहे रजा में अपने स्वामी की
कभी नहीं वो शिकायत करता
जाने माने वही पहचाने भी
सर्वोच्च शक्ति की इच्छा पा सकता
होकर नतमस्तक आभारी होता
हर पल मन मे स्मरण भी करता
सत्य ज्ञान प्रकाश को पाकर
मिथ्या जग में नहीं उलझता
मिल जाते फिर उद्देश्य जन्म के
पूर्ण निष्ठा से समर्पित रहता
साँझ सवेरे और हर वेले
जो जन उसको मन मे है रखता
तोड़ नियम अपने ही विधि के
ईश्वर उसके संग फिर रहता
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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