प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सत्य सनातन और शाश्वत होता निर्मल पावन और निश्छल होता जिसे कहा निरंकार ओंकार या ईश्वर खुदा वाहिद गॉड वाहेगुरु जो मनुष्य को कर्मफल देता जो नीली छतरी वाला कहलाता वही है करता धर्ता सृष्टि का जगत पिता औ संचालनकर्ता समझें जाने माने उसको रहें आभारी वो कर्मफलदाता व्यवहार हमारा पाप पुण्य है दृष्टिकोण पर ये निर्भर करता हम मनुष्य सर्श्रेष्ठ प्राणी है कर्तव्य हमारे निर्धारित करता जिस शक्ति ने उपकार किये उसके प्रति शीश ये झुकता भू जल नभ वायु और अग्नि असंख्य अगोचर तत्व प्रदाता श्वांस चले जिसकी इच्छा से जो कण कण में सृष्टि के होता हे सर्वशक्तिमान ये विनय हमारी सदा शरण हमे मिले तुम्हारी कर्म सदा हो तुम्हे समर्पित श्री चरणों मे अरदास हमारी 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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