प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी परब्रह्म परमेश्वर है जो परम् शक्ति ही कहलाती है वही ब्रह्म जो परब्रह्म भी जिसने वेद ग्रन्थ लिखवाए वही शक्ति कभी कभी अपने बारे में ज्ञान कराए वीर पीर और देवी देव क्या कैसे भगवानों के नाम धराये एक ही कर्ता हर रूप में कैसे एक शक्ति ही सबकुछ है कराए जिसका जितना म्यांर है होता उतना ही शक्ति नाम करवाये जिसकी जैसी भक्ति होती उससे उतना प्रदर्शन करवाये सबमें अंश उसी शक्ति का कर्मफल यही आधार बनाये जो जितना समर्पित हो रहता जीवन वो अपना सफल बनाये करे सदा सदव्यवहार वो सभी से ईश कृपा का वो पात्र बन जाये सुबह सांझ नित वन्दन अर्चन ध्यान प्रार्थना में समय बिताये आओ विचार करें मिल सारे काहे मानष जन्म हम पाये करें वही जो खुद को हम चाहे नेक कर्म प्यार कर पाएं सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना प्रभु सबका ही मंगल हो जाये 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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