प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सर्वोच्च एक वही शिव कहलाये शाश्वत शक्ति का जो वोध कराए नहीं कोई वो वाघम्बरधारी वो ही ब्रह्म अल्लाह कहलाये एक ओंकार ॐ वाहेगुरु सब पूर्ण परमेश्वर के नाम कहाये शक्ति एक जो अनादि अनन्त अगम्य अगोचर ही जानी जाये कहते जिसको अजोनि अजन्मा नहीं पूर्ण सत्य कभी भेद बताये जिसको जैसा अनुभव दे दीन्हा प्राणी उसे ही सत्य मान जाये पूर्ण ज्ञान का रहा आभाव जिस कारण मतान्तर आये नहीं कभी शक्ति ने कहा किसी को वो जन्म लेकर् भू पर नहीं आये समय वातावरण के अनुसार परम् शक्ति ने अनुभव करवाये चाहे मनुष्य से मात्र इतना ही जाने माने पहचान कराए अंश है जिसका प्राणी का जीवन उसी की इच्छा श्वांसे चलवाये एक सत्य प्रकाश सब जाने एक नूर से ही जो प्रेम फैलाये कर्तव्य मनुष्य का उस शक्ति प्रति नतमस्तक हो आभार जताये सर्वश्रेष्ठ कृति जो सकल सृष्टि में वही मात्र मानव कहलाये मानवोत्त्पत्ति से पूर्व ही उसने मानवोपयोगी संसाधन बनाये हरी भरी ये बसुन्धरा जल वायु नील गगन में सुमन खिलाये फिर क्यों मानव तू है भूला जो तेरा भी अस्तित्व कहलाये प्रातः वन्दन दिवस आरम्भ है कर्म सुमङ्गल तब ही कर पाए साँझ वन्दना क्षमा याचना है जो आंकलन खुद का करवाये करे कर्म व्यवहार सबसे जो खुद को भी उनसे जो हम छाए मीठी वाणी हो कर्म समर्पित निज स्वार्थ से ऊपर उठ पाएं क्यों आया है तू इस जग में मुक्ति इच्छाओं को जीत हम पाये सतत नमन करें श्री चरणों में सदवुद्धि सदमार्ग सदा पाये 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

Comments

Popular posts from this blog

मुफ़्त खोरी