प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी ईश्वर एक वो सर्वशक्तिमान सर्वोच्च उसी का एक विधान नर नारी या किसी रूप से प्रेम पाश से बन जाता इंसान जो जैसे मुझे जहाँ बुलाये प्यार निःस्वार्थ हो अनुसंधान अदृश्य असदृश्य से परे होता सृष्टि का जो शाश्वत प्राण समझो सत्य की गहराई को कहता क्या है मर्म औ ज्ञान जड़ नहीं मैं सदा चेतन हूँ अनुभव करता प्यार सम्मान करके सुसज्जित सृष्टि सारी आवश्यकतानुसार दिए प्रमाण मन में प्रीत की यदि हो डोरी देता उसको आवाज़ व ज्ञान करे अनुपालन वो नियमो का समर्पित कर्म करे मन ध्यान करे व्यव्हार सदा जो सभी से पा लेता वो मुझसे तत्व ज्ञान आदर सत्कार विनम्र भाव से सदा हृदय में रखता जो मान करे वन्दना जो सच्चे मन से श्री चरणों में पाए वो धाम जीवन उसका रहे प्रफुल्लित कार्य करे जो होकर निष्काम अखण्ड आद्यात्म इस जगत का उद्देश्य सभी का है परम धाम धर्म जाति क्षेत्र रंग भेद से ऊपर परम शक्ति की सत्ता का भान शक्ति मात्र शक्ति ही सदा रहती एक ही कर्ता जो भी हो रूप नाम पुनः आराधना है श्री चरणों में सदा करें प्रभु मानव कल्याण 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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