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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
कण कण में वो बसने वाला
सकल सृष्टि को रचने वाला
राम रहीम वो भेजने वाला
पैगम्बर का वो ऊपर वाला
देवी देव जिसको है भजते
भगवानों का भी वो रखवाला
वीरों पीरों का जो पूज्नीय
एक ईश्वर वो अल्लाह ताला
साकार निराकार वो निर्विकार
अकाल पुरुख परमेश्वर आला
हर प्राणी में अंश है जिसका
करुणासिन्धु वो ही कृपाला
न्यायप्रिये सत्य प्रेम रंग में
सदा सदा वो रहने वाला
मानव उसकी सर्वश्रेष्ठ रचना
चाहे उससे वो व्यवहार निराला
करे वही जो औरों से चाहे खुद
मन को बनाये पवित्र शिवाला
आदर सत्कार करें हम सबसे
हृदय प्रेम का रहे सदा उजाला
कर्म करें सत्य समर्पित होकर
लोचन दर्शन मन मोहने वाला
सर्वज्ञ सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान
एक मात्र कर्मफल को देने वाला
जीवन के सारे संसाधन प्रकृति में
निश्चित मनुष्य को करने वाला
सुख दुःख अपने कर्मो का फल
शूली को शूल कर देने वाला
बन्ध जाता निःस्वर्थ प्रेम में
पत्थर में भी प्रकट होने वाला
सूफी के सरगम की खुश्बू
वो मीरा के शब्दों की माला
करे वन्दना साँझ सवेरे हम
दृष्टि दया की रखे दीनदयाला
करें प्रेम हम हर प्राणी से ही
सभी में तेरा अंश निराला
जाने माने और प्यार करे हम
एक ही शक्ति का नूर निराला
धर्म जाति क्षेत्र से ऊपर है
ईश प्रेम का दीप उजाला
करें नमन हम सतत चरणों में
वहती जहाँ सत्य प्रेम की धारा
करें ज्ञान से खुद को प्रज्ज्वलित
जय जय जय हे दीन दयाला
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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