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जय श्री मदन जी
प्रतः वन्दन
परम् शक्ति अनादि अनन्त है
निरंकार जिसको कहते है
वो साकार भी होती आई
ये भक्ति की पराकाष्ठा पर है
नहीं सिमित हम कर सकते
ये तो उसकी सपनी इच्छा है
जिसने सारी सृष्टि बना दी
कुछ भी हो उसके निर्णय पर है
दिए प्रमाण सदृश्य रूप में
रहती अदृश्य प्रायः मगर है
जड़ नहीं वो शक्ति चेतन है
हो जाये जिसको भान अगर है
प्रथम स्थान जीवन वो देता
न कोई शिकायत करता फिर है
रजा में उसको रहना आ जाता
हो जाता प्यार न कोई फ़िक्र है
प्यार करे सदा औरों से वो फिर
मन में खोने का रहता डर है
व्यवहार औरों से सदा वही करता
औरों से स्वयं को चाहे खुद है
प्रातः नित्य वो करे वन्दना
आंकलन करता रात्रि पहर है
यदि ईश्वर से कुछ पाना चाहते
स्वीकृति अस्तित्व यही डगर है
खोजे उसको प्यार करे वो
रहे सदा हम उसके आभारी
जो भी जीवन मूल तत्व है
की प्रभु ने वो रचना सारी
करें प्यार और खुश्बू फैलाये
नित चरणों में शीश झुकायें
नेककर्म सदव्यवहार करें हम
सत्य ज्ञान प्रकाश फैलाएं
करें व्यवहार वही औरों से
जैसा औरों से स्वयं को चाहे
हे सत्य सनातन सृष्टि के स्वामी
श्री चरणों में वन्दना हम गाएँ
प्रातः काल का प्रथम स्मरण तुम्
तत्पश्चात दिन आरम्भ हो चाहे
मन वुद्धि पर नियंत्रण रखना
जो तुम् चाहो वो ही कर पाएं
कोटि नमन पुनः चरणों में
कृपा दृष्टि आपकी हम चाहें
👏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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