दिया सम्बोधन उत्तराधिकारी ने कल का सुखद अनुभव है दिया गृह प्रवेश के शुभ अवसर पर आशीष अपना प्रदान किया धन्य हुए है ये सज्जन जन घर को पवित्र पुनीत किया अमृत वाणी जिसने जितना किया है जप तप उनका उतना नाम किया भक्ति अमर करने की खातिर उनके रूपों में कार्य किया पूर्ण परमेश्वर लगा सम्मुख क्यों आधार घोषणा स्पष्ट किया सर्वोच्च शक्ति की आई है भू पर क्रियात्मक रूप में सिद्ध किया नियम गुण और अपनी शक्तियां दे प्रमाण अनुभूत किया श्री मदन धाम है प्रशिक्षण केंद्र आध्यात्मवाद एक गहरा सागर अध्यात्म -भौतिक इक जोड़ा है अध्यात्म की जरूरत ईश प्रेम है आत्मा की खुराक कहलाती ठीक उसी प्रकार कि कैसे भौतिक तन की जरूरत होती कुल देवता से भगवानों तक अध्यात्म में निश्चित पड़ाव दिए परम् शक्ति की शरण वो पाये जिसको उसने कुछ वचन दिए है आवश्यक समझना उसको जानो मानो पहचान करो सत्य ज्ञान को अमल में लाकर साकार रूप से प्यार करो सकल सृष्टि को रचने वाला कर्ता धर्ता वही है धर्ता आज वही इंसान बना है एलान उसी ईश्वर का मदन नाम उसने है रखा लगे भले साधारण इंसान पर पहचान स्वयं ही बताई है सर्वगुणों का करें प्रदर्शन पूज्य सभी का सकल सृष्टि में कोई नहीं है इष्ट मदन जी का न् ही गुरु या आराध्य है कोई नहीं हो सका प्रतीकों का स्थापन सात रंग का ध्वज भी दिया ज्ञान दिया है मद का ही ग्रन्थों आदि न् ज़िक्र किया पूर्ण ज्ञान और गहन भेद जो प्रशिक्षण केंद्र द्वारा स्पष्ट किया सर्वोच्च पूर्ण जो है सृष्टि में वही ये सब कर् सकता द्वान्दो का किया निवारण असम्भव जिसको कह दिया गया कौन है करता प्रत्येक रूप में एक ईश्वर कैसे होता है रचना और रचयिता का रिश्ता कर्मफल क्या आधार है क्या क्या यूँ रहती है परम् शक्ति अदृश्य ही युगों बाद पर धरती पर आती जड़ नहीं वो चेतन है वि इंसा से कुछ चाहे इसीलिये समय समय पर महात्माओं द्वारा नाम प्रतीक दिये भटक गया स्वार्थ में मानव उनको जी करता मान लिया करो दूसरों से चाहो जो स्वयं को ये पाप पुण्य की है परिभाषा यही आधार है परमशक्ति यदि कोई चल पाता है मुक्ति मोक्ष को वो पाकर स्वयं अलौकिक हो जाता है गुणगान है हिस्सा कार्यप्रणाली का जिसमे आप सम्मलित हुए हैं शुभाशीर्वाद

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