प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी जन्म जन्म की जिन्ह भक्ति ईश कृपा वरदान जो पाये वही महानात्मये जगत में ऋषि मुनि देवी देव कहाये सर्वोच्च शक्ति ही वरदाती जो सकल सृष्टि इच्छा से चलाए कर्मफल तो पाना है पड़ता क्या है जो इससे मुक्त कराए मानव तो गलतियां ही करता कई बार दुष्कर्म भी हो जाये नित्य प्रातः करो वन्दना मन से मन कर्म वचन नियंत्रण पाये इसी प्रकार शयन समय भी दिवस कर्म विश्लेषण चाहे ईर्ष्या द्वेष विकारों से ऊपर मनुष्य अपराध बोध को पाये कितना सद्व्यवहार किया है करे आंकलन प्रयाश्चित कर पाए मन में ग्लानि अनुभूति संग क्षमा भाव से शीश झुकाये करे प्रयास सदा वो स्वयं से नहीं भविष्य में गलती दोहराए अहसास जिसे जब हो जाता नित्य वो प्रार्थना करता ही जाये समझे एक ईश्वर के परम सत्य को ज्ञान से आत्म वोध को जगाये परम शक्ति नहीं कोई जीवन गाथा इनसे ऊपर ही ईश्वर को पाये कड़तव्यनिष्ठ हो कर्म करे वो हृदय में लौ ईश प्रेम को जगाये जीवन का उद्देश्य वो पाता मानव जीवन सफल हो जाये कोई नहीं फिर पराया लगता सब में ईश का अंश समाये मेरे ही जैसा संसार है ये सारा ईश प्रेम ही इसको सजाये करूँ नमन मैं श्री चरणों में सदा सदा तुम्हारी शरण को पाएं 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

Comments

Popular posts from this blog

मुफ़्त खोरी