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Showing posts from January, 2018
🌸☘🌻🌸☘🌻🌸☘🌻🌸 अपनी सच्चाई की राह को कभी मत छोड़ना क्योकि झूठ कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे हार माननी ही पड़ती है। 🙏 🌸☘🌻🌸☘🌻🌸☘🌻🌸
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*This One is..* *An Eye OPENER..!* कल दिल्ली से गोवा की उड़ान में एक सरदारजी मिले। साथ में उनकी पत्नि भी थीं। सरदारजी की उम्र करीब 80 साल रही होगी। मैंने पूछा नहीं लेकिन सरदारनी भी 75 पार ही रही होंगी। उम्र के सहज प्रभाव को छोड़ दें, तो दोनों करीब करीब फिट थे। सरदारनी खिड़की की ओर बैठी थीं, सरदारजी बीच में और मै सबसे किनारे वाली सीट पर था। उड़ान भरने के साथ ही सरदारनी ने कुछ खाने का सामान निकाला और सरदारजी की ओर किया। सरदार जी कांपते हाथों से धीरे-धीरे खाने लगे। फिर फ्लाइट में जब भोजन सर्व होना शुरू हुआ तो उन लोगों ने राजमा-चावल का ऑर्डर किया। दोनों बहुत आराम से राजमा-चावल खाते रहे। मैंने पता नहीं क्यों पास्ता ऑर्डर कर दिया था। खैर, मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जो ऑर्डर करता हूं, मुझे लगता है कि सामने वाले ने मुझसे बेहतर ऑर्डर किया है। अब बारी थी कोल्ड ड्रिंक की। पीने में मैंने कोक का ऑर्डर दिया था। अपने कैन के ढक्कन को मैंने खोला और धीरे-धीरे पीने लगा। सरदार जी ने कोई जूस लिया था। खाना खाने के बाद जब उन्होंने जूस की बोतल के ढक्कन को खोलना शुरू किया तो ढक्कन खुले ही नहीं। सरदारजी कांपते हाथों से उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे। मैं लगातार उनकी ओर देख रहा था। मुझे लगा कि ढक्कन खोलने में उन्हें मुश्किल आ रही है तो मैंने शिष्टाचार हेतु कहा कि लाइए... " मैं खोल देता हूं।" सरदारजी ने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहने लगे कि... "बेटा ढक्कन तो मुझे ही खोलना होगा। मैंने कुछ पूछा नहीं, लेकिन सवाल भरी निगाहों से उनकी ओर देखा। यह देख, सरदारजी ने आगे कहा बेटाजी, आज तो आप खोल देंगे। लेकिन अगली बार..? कौन खोलेगा.? इसलिए मुझे खुद खोलना आना चाहिए। सरदारनी भी सरदारजी की ओर देख रही थीं। जूस की बोतल का ढक्कन उनसे अभी भी नहीं खुला था। पर सरदारजी लगे रहे और बहुत बार कोशिश कर के उन्होंने ढक्कन खोल ही दिया। दोनों आराम से जूस पी रहे थे। मुझे दिल्ली से गोवा की इस उड़ान में *ज़िंदगी का एक सबक मिला।* सरदारजी ने मुझे बताया कि उन्होंने.. ये नियम बना रखा है, कि अपना हर काम वो खुद करेंगे। घर में बच्चे हैं, भरा पूरा परिवार है। सब साथ ही रहते हैं। पर अपनी रोज़ की ज़रूरत के लिये वे सिर्फ सरदारनी की मदद ही लेते हैं, बाकी किसी की नहीं। वो दोनों एक दूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं सरदारजी ने मुझसे कहा कि जितना संभव हो, अपना काम खुद करना चाहिए। एक बार अगर काम करना छोड़ दूंगा, दूसरों पर निर्भर हुआ तो समझो बेटा कि बिस्तर पर ही पड़ जाऊंगा। फिर मन हमेशा यही कहेगा कि ये काम इससे करा लूं, वो काम उससे। फिर तो चलने के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ेगा। अभी चलने में पांव कांपते हैं, खाने में भी हाथ कांपते हैं, पर जब तक आत्मनिर्भर रह सको, रहना चाहिए। हम गोवा जा रहे हैं, दो दिन वहीं रहेंगे। हम महीने में एक दो बार ऐसे ही घूमने निकल जाते हैं। बेटे-बहू कहते हैं कि अकेले मुश्किल होगी, पर उन्हें कौन समझाए कि मुश्किल तो तब होगी जब हम घूमना-फिरना बंद करके खुद को घर में कैद कर लेंगे। पूरी ज़िंदगी खूब काम किया। अब सब बेटों को दे कर अपने लिए महीने के पैसे तय कर रखे हैं। और हम दोनों उसी में आराम से घूमते हैं। जहां जाना होता है एजेंट टिकट बुक करा देते हैं। घर पर टैक्सी आ जाती है। वापिसी में एयरपोर्ट पर भी टैक्सी ही आ जाती है। होटल में कोई तकलीफ होनी नहीं है। स्वास्थ्य, उम्रनुसार, एकदम ठीक है। कभी-कभी जूस की बोतल ही नहीं खुलती। पर थोड़ा दम लगाओ, तो वो भी खुल ही जाती है। -------------- मेरी तो आखेँ ही खुल की खुली रह गई। मैंने तय किया था कि इस बार की उड़ान में लैपटॉप पर एक पूरी फिल्म देख लूंगा। पर यहां तो मैंने जीवन की फिल्म ही देख ली। एक वो फिल्म जिसमें जीवन जीने का संदेश छिपा था। “जब तक हो सके, आत्मनिर्भर रहो।” अपना काम, जहाँ तक संभव हो, स्वयम् ही करो। ---------और😅 *पसंद आए तो,.....👉👉👉* 👍
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😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀 आज संसार में डिनर सेट से लेकर गहनों के सेट तक सभी प्रकार के सेट है लेकिन मन को सेट करने का कोई ज्ञान नही है और जब तक मन अपसेट है तो बाकी सेट बेकार है। मेडिटेशन हमारे मन को चार्ज करता है सेट करता है। हमारे मन के भीतर असीम संभावनाए समाई हुई जिसे हम मेडिटेशन के दवारा जीवन में ला सकते है। जरूरत है स्वंय के सच्चे परिचय की। हम इस भौतिक पांच तत्वो के शरिर में रहने वाली एक चैतन्य शक्ति आत्मा है। जिसका मूल स्वाभाव प्रेम,सुख, शांति,आनंद आदि है। इसका ज्ञान होते ही जीवन मे खुशी की शुरूआत होने लगती है | 😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀
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*मूर्खों के लक्षण* *महा निकम्मे* = फ्री में बैलेंस, मोबाइल, pendrive, T-shirt, झुनझुना आदि के लिए मैसेज भेजते रहते हैं, जो इन्हें कभी नहीं मिलते। *महा मूर्ख* =ये 2-2 साल पुराने मैसेज को मार्किट में नया है कहकर फारवर्ड करते रहते हैं। जैसे फलां जगह बच्ची मिली है इसे घर वालों तक पहुंचाओ। इनमें तारीख़ नहीं होती। तारीख़ होती तो पोल खुल जाती। *कुछ पागल* = ऐसे एक्सीडेंट की खबरे भेजते हैं, जो 2 साल पहले हुआ था। इनमें भी तारीख़ कभी नहीं होती। *महा बेवकूफ* =व्यर्थ की साईं इमेज, फूल, पत्ती या 1121 ॐ लिखकर कसम देकर लोगों को फारवर्ड करके अपनी बला ग्रुप के मेम्बरों पर चिपकाते हैं। ( *क्या मिलता है भाई???*) *महा मंद बुद्धि* ="पुजारी मंदिर में पूजा कर रहा था फिर एक सांप/बन्दर आया और उसने इंसान का रूप ले लिया" इसे आगे भेजो लाटरी निकल जायेगी। *(अरे मूर्ख तेरी ही नहीं निकली तो दूसरे की क्या खाक निकलेगी?)* *कुछ मंदबुद्धि* =अभी अभी पैदा हुए बच्चे के गले में आलपिन फंस गई, 50 लाख लगेंगे *बच्चे के गले में आलपिन कौन डालेगा* ? *कौनसे ऑपरेशन में 50 लाख लगते हैं भाई ?* ऊपर से बोलेंगे कि *प्रति शेयर 50 पैसा* व्हाट्सऐप की तरफ से मिलेगा। जबकि सच्चाई ये है की व्हाट्सएप्प को 19 बिलियन डॉलर में खरीदने वाले मार्क जकरबर्ग को इससे अभी 25 पैसे नही मिलते। सबसे बड़ी *बेवकूफी* तो तब होती है जब कोई कहता है कि- "मैसेज आगे भेजो आपकी बैटरी फुल चार्ज हो जायगी"/ *घोडा दौड़ने लगेगा*, भैंस का रंग बदल जायेगा या ताला खुल जायेगा। *(भाई physics नाम की भी कोई चीज़ होती है।)* *कुछ लल्लू* = किसी आदमी के डॉक्यूमेंट, डिग्रियाँ गिर गए हैं, ये मैसेज उस तक पहुचाने में मदद करें. *(अरे मंदबुद्धि डॉक्यूमेंट आधार कार्ड ,अंकसूचि,परिचय पत्र में उसका पता नहीं है क्या???)* यदि इनमें से कोई भी लक्षण आप में हैं, तो आप भी Whatsapp पर अपनी अल्प बुद्धि का परिचय दे रहे हैं। *अनावश्यक पोस्ट डालकर मोबाइल को कूड़ाघर नहीं बनायें। कोई भी msg पोस्ट करने से पहले सोच लें कि आप क्या पोस्ट कर रहे हैं। थोड़ा अपना दिमाग लगाएँ।* *अगर आपको भी बेकार के मैसेज से बचना है तो इसे अन्य ग्रुप में भेजो ताकि मंदबुद्धि उन्हें पढ़ लें। आपको फालतू के msg आना बंद हो जायेंगे। और ऐसे पागलो से पीछा छूट जायेगा*
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💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐 कहते हैं कि भरोसा अगर ईश्वर पर है तो जो लिखा है तकदीर में,वो ही पाओगे !मगर,भरोसा अगर खुद पर है तो ईश्वर वही लिखेगा जो आप चाहोगे !!! 💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐
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🙏 🙏 याद रखें... जो भी बुरी *आदत* आज आपको आनंद की अनुभूति देती है, एक दिन उससे आपको उतना ही दुःख का *अनुभव* होगा और उसे छोड़ने में बहुत कड़ा परिश्रम करना पड़ेगा। अतः जीवन में हर चीज *विवेक* से चुनें... *मन* से नहीं...!! 🌸 सुप्रभात... 💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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🌺🍀🌻🌺🍀🌻🌺🍀🌻🌺 परमात्मा के लिये खर्च की हुई कोई चीज बेकार नही जाती, चाहे सॉंसे हो या समय,वो हमे ब्याज समेत वापिस करते है, इसलिए खूब भजन सिमरण करो!!! 🌺🍀🌻🌺🍀🌻🌺🍀🌻🌺
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जानिये , भारत मे छुआछूत की शुरुआत कैसे हुई और किसने की ..... यह सच्चा इतिहास किसीने बताया नही , पर प्रमाण के साथ पढें 👇👇👇 #महत्तर... क्या आप जानते हैं कि समाज के लोगों ने जिन भंगी और मेहतर जाति को अछूत करार दिया और जिनके हाथ का छुआ तक आज भी बहुत सारे हिंदू नहीं खाते, उनका पूरा इतिहास साहस, त्याग और बलिदान से भरा पड़ा है। मुगल काल में ब्राह्मणों और क्षत्रियों को दो रास्ते दिए गए, या तो इस्लाम कबूल करो या फिर मुसलमानों का मैला ढोओ क्योंकि तब भारतीय समाज में इन दोनों समुदायों का अत्यंत सम्मान था और इनके लिए ऐसा घृणित कार्य करना मर जाने के समान था। इसीलिए मुगलों ने इनके धर्मान्तरण के लिए यह तरीका अपनाया। आप किसी भी मुगल किले में चले जाओ वहां आपको शौचालय नहीं मिलेगा। जबकि हजारों साल पुरानी हिंदुओं की उन्नत सिंधु घाटी सभ्यता के खण्डहरों में रहने वाले कमरे से सटा शौचालय मिलता है। सुल्तानों और मुगलों को शौचालय निर्माण का ज्ञान तक नहीं था। दिल्ली सल्तनत में बाबर, अकबर, शाहजहाँ से लेकर सभी मुगल बादशाह बर्तनों में शौच करते थे, जिन्हें उन ब्राहम्णों और क्षत्रियों के परिजनों से फिकवाया जाता था, जिन्होंने मरना तो स्वीकार कर लिया था, लेकिन इस्लाम को अपनाना नहीं। जिन ब्राहमणों और क्षत्रियों ने मैला ढोने की प्रथा को स्वीकार करने के उपरांत अपने जनेऊ को तोड़ दिया, अर्थात #उपनयन_संस्कार को #भंग कर दिया, वो #भंगी कहलाए। और मेहतर- इनके उपकारों के कारण। तत्कालिन हिंदू समाज ने इनके मैला ढोने की नीच प्रथा को भी 'महत्तर' अर्थात महान और बड़ा करार दिया था, जो अपभ्रंश रूप में '#मेहतर' हो गया। भारत में 1000 ईस्वी में केवल 1 फीसदी अछूत जाति थी, लेकिन मुगल वंश की समाप्ति होते-होते इनकी संख्या 14 फीसदी हो गई। आपने सोचा कि ये 13 प्रतिशत की बढोत्तरी मुगल शासन में कैसे हो गई। जो हिंदू डर और अत्याचार के मारे इस्लाम धर्म स्वीकार करते चले गए, उन्हीं के वंशज आज भारत में मुस्लिम आबादी हैं। जिन ब्राह्मणों और क्षत्रियों ने मरना स्वीकार कर लिया उन्हें काट डाला गया और उनके असहाय परिजनों को इस्लाम कबूल नहीं करने की सजा के तौर पर अपमानित करने के लिए नीच मैला ढोने के कार्य में धकेल दिया गया। वही लोग भंगी और मेहतर कहलाए। डॉ सुब्रहमनियन स्वामी लिखते हैं, '' अनुसूचित जाति उन्हीं बहादुर ब्राह्मण व क्षत्रियों के वंशज है, जिन्होंने जाति से बाहर होना स्वीकार किया, लेकिन मुगलों के जबरन धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया। आज के हिंदू समाज को उनका शुक्रगुजार होना चाहिए, उन्हें कोटिश: प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि उन लोगों ने हिंदू के भगवा ध्वज को कभी झुकने नहीं दिया, भले ही स्वयं अपमान व दमन झेला।'' प्रख्यात साहित्यकार अमृत लाल नागर ने अनेक वर्षों के शोध के बाद पाया कि जिन्हें "भंगी", "मेहतर" आदि कहा गया, वे ब्राहम्ण और क्षत्रिय थे। स्टेनले राइस ने अपने पुस्तक "हिन्दू कस्टम्स एण्ड देयर ओरिजिन्स" में यह भी लिखा है कि अछूत मानी जाने वाली जातियों में प्राय: वे बहादुर जातियां भी हैं, जो मुगलों से हारीं तथा उन्हें अपमानित करने के लिए मुसलमानों ने अपने मनमाने काम करवाए थे। गाजीपुर के श्री देवदत्त शर्मा चतुर्वेदी ने सन् 1925 में एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम 'पतित प्रभाकर' अर्थात मेहतर जाति का इतिहास था। इस छोटी-सी पुस्तक में "भंगी","मेहतर", "हलालखोर", "चूहड़" आदि नामों से जाने गए लोगों की किस्में दी गई हैं, जो इस प्रकार हैं (पृ. 22-23) नाम जाति भंगी- वैस, वैसवार, बीर गूजर (बग्गूजर), भदौरिया, बिसेन, सोब, बुन्देलिया, चन्देल, चौहान, नादों,यदुबंशी, कछवाहा, किनवार-ठाकुर, बैस, भोजपुरी राउत,गाजीपुरी राउत, गेहलौता, मेहतर, भंगी, हलाल, खरिया, चूहड़- गाजीपुरी राउत, दिनापुरी राउत, टांक, गेहलोत, चन्देल, टिपणी। इन जातियों के जो यह सब भेद हैं, वह सबके सब क्षत्रिय जाति के ही भेद या किस्म हैं। (देखिए ट्राइब एण्ड कास्ट आफ बनारस, छापा सन् 1872 ई.) यह भी देखिए कि सबसे अधिक इन अनुसूचित जातियों के लोग आज के उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल, मध्य भारत में है, जहां मुगलों के शासन का सीधा हस्तक्षेप था और जहां सबसे अधिक धर्मांतरण हुआ। आज सबसे अधिक मुस्लिम आबादी भी इन्हीं प्रदेशों में है, जो धर्मांतरित हो गये थे। क्या आप सभी खुद को हिंदू कहने वाले लोग उस अनुसूचित जाति के लोगों को आगे बढ़कर गले लगाएंगे, उनसे रोटी-बेटी का संबंध रखेंगे। यदि आपने यह नहीं किया तो समझिए, हिंदू समाज कभी एक नहीं हो पाएगा और एक अध्ययन के मुकाबले 2061 से आप इसी देश में अल्पसंख्यक होना शुरू हो जाएंगे। इसलिए भारतीय व हिंदू मानसिकता का विकास कीजिए और अपने सच्चे इतिहास से जुड़िए। आज हिंदू समाज को अंग्रेजों और वामपंथियों के लिखे पर इतना भरोसा हो गया कि उन्होंने खुद ही अपना स्वाभिमान कुचल लिया और अपने ही भाईयों को अछूत बना डाला। आज भी पढे लिखे और उच्च वर्ण के हिंदू जातिवादी बने हुए हैं, लेकिन वह नहीं जानते कि यदि आज यदि वह बचे हुए हैं तो अपने ऐसे ही भाईयों के कारण जिन्होंने नीच कर्म करना तो स्वीकार किया, लेकिन इस्लाम को नहीं अपनाया। आज भारत में 23 करोड़ मुसलमान हैं और लगभग 30 करोड़ अनुसूचित जातियों के लोग हैं। जरा सोचिये इन लोगों ने भी मुगल अत्याचारों के आगे हार मान ली होती और मुसलमान बन गये होते तो आज भारत में मुस्लिम जनसंख्या 50 करोड़ के पार होती और आज भारत एक मुस्लिम राष्ट्र बन चुका होता। यहाँ भी जेहाद का बोलबाला होता और ईराक, सीरिया, सोमालिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आदि देशों की तरह बम-धमाके, मार-काट और खून-खराबे का माहौल होता। हम हिन्दू या तो मार डाले जाते या फिर धर्मान्तरित कर दिये जाते या फिर हमें काफिर के रूप में अत्यंत ही गलीज जिन्दगी मिलती। कृपया अपना वास्तविक इतिहास जानिए और इससे सबक लीजिए क्योंकि इतिहास खुद को दोहराता जरूर है। धन्य हैं हमारे ये भाई जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी अत्याचार और अपमान सहकर भी हिन्दुत्व का गौरव बचाये रखा और तरह-तरह से भारतवासियों की सेवा की। हमारे अनुसूचित जाति के भाइयों को मेरी तरफ से शत्-शत् प्रणाम और दिल से सैल्यूट । #जाती_वर्ण_भेद_मिटायें *
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💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐 जिंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना..... क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वजन से डूब जाता है !!! 🙏सुप्रभात🙏 💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐
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🙏🙏 🌹 *गुस्सा अकेला आता हैं, मगर हमसे सारी अच्छाई ले जाता हैं।* *सब्र भी अकेला आता हैं, मगर हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!* *परिस्थितियाँ जब विपरीत होती है, तब व्यक्ति का "प्रभाव और पैसा" नहीं "स्वभाव और सम्बंध" काम आते है।* *जो ईश्वर के सामने झुकता है*.... *ईश्वर उसे किसी के सामने झुकने नही देता है।* 🌹 🙏 🙏
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एक अफ्रीकी पर्यटक ऐसे शहर मे आया जो शहर उधारी में डूबा हुआ था ! पर्यटक ने 1000 Rs होटल (जिसमे छोटा सा रेस्टोरेंट भी था) के काउंटर पर रखे और कहा मैं जा रहा हूँ कमरा पसंद करने होटल का मालिक फ़ौरन भागा कसाई के पास और उसको 1000 Rs देकर मटन मीट का हिसाब चुकता कर लिया ! कसाई भागा गोट फार्म वाले के पास और जाकर बकरों का हिसाब पूरा कर लिया ! गोट फार्म वाला भागा बकरों के चारे वाले के पास और चारे के खाते में 1000 Rs कटवा आया ! चारे वाला गया उसी होटल पर ! वो वहां कभी कभी उधार में रेस्टोरेंट मे खाना खाता था। 1000 Rs देके हिसाब चुकता किया ! पर्यटक वापस आया और यह कहकर अपना 1000 Rs ले गया कि उसे कोई रूम पसंद नहीं आया ! *न किसी ने कुछ लिया* *न किसी ने कुछ दिया* सबका हिसाब चुकता ! बताओ गड़बड़ कहाँ है ? *कहीं गड़बड़ नहीं है बल्कि यह सभी की गलतफहमी है कि रुपये हमारे है।* *खाली हाथ आये थे,* *खाली हाथ ही जाना है।* *विचार करें और जीवन का आनंद लें।* 🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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प्रार्थना की शक्ति एक वृद्ध महिला एक सब्जी की दुकान पर जाती है.उसके पास सब्जी खरीदने के पैसे नहीं होते.वो दुकानदार से प्रार्थना करती है कि उसे सब्जी उधार दे दे.पर दुकानदार मना कर देता है.बार बार आग्रह करने पर दुकानदार खीज कर कहता है," तुम्हारे पास कुछ ऐसा है जिसकी कोई कीमत हो तो उसे इस तराजू पर रख दो, मैं उसके वज़न के बराबर सब्जी तुम्हे दे दूंगा." वृद्ध महिला कुछ देर सोच में पड़ जाती है.उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं था.कुछ देर सोचने के बाद वह एक मुड़ा तुड़ा कागज़ का टुकड़ा निकलती है और उस पर कुछ लिख कर तराजू पर रख देती है.दुकानदार ये देख कर हंसने लगता है.फिर भी वह थोड़ी सब्जी उठाकर तराजू पर रखता है. आश्चर्य...!!!कागज़ वाला पलड़ा नीचे रहता है और सब्जी वाला ऊपर उठ जाता है.इस तरह वो और सब्जी रखता जाता है पर कागज़ वाला पलड़ा नीचे नहीं होता. तंग आकर दुकानदार उस कागज़ को उठा कर पढता है और हैरान रह जाता है. कागज़ पर लिखा था..."हे इश्वर, तुम सर्वज्ञ हो, अब सब कुछ तुम्हारे हाथ में है,.." दुकानदार को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था.वो उतनी सब्जी वृद्ध महिला को दे देता है.पास खड़ा एक अन्य ग्राहक दुकानदार को समझाता है," दोस्त,आश्चर्य मत करो. केवल ईश्वर ही जानते हैं की प्रार्थना का मूल्य क्या होता है." वास्तव में प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है.चाहे वो एक घंटे की हो या एक मिनट की .यदि सच्चे मन से की जाये तो ईश्वर अवश्य सहायता करते हैं.अक्सर लोगों के पास ये बहाना होता है की हमारे पास वक्त नहीं.मगर सच तो ये है कि ईश्वर को याद करने का कोई समय नहीं होता प्रार्थना के द्वारा मन के विकार दूर होते हैं और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का बल मिलता है.ज़रूरी नहीं की कुछ मांगने के लिए ही प्रार्थना की जाये.जो आपके पास है उसका धन्यवाद करना चाहिए.इससे आपके अन्दर का अहम् नष्ट होगा और एक कहीं अधिक समर्थ व्यक्तित्व का निर्माण होगा.प्रार्थना करते समय मन को ईर्ष्या,द्वेष,क्रोध घृणा जैसे विकारों से मुक्त रखें. प्रातः काल दैनिक प्रार्थना को जीवन का एक अनिवार्य अंग अवश्य बनाना चाहिए.इससे न केवल शक्ति मिलेगी बल्कि बुराई या अकर्म के प्रति आसक्ति भी कम होगी...🌺🙏
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कुछ भी करें उनके लिए खेल बन गई, सियासत कुछ लोगों की रखैल बन गई। PM मोदी ने विज्ञापन पर खर्च किए 3,755 करोड़ रुपए, वहीं सत्ता संभालने के बाद से अब तक प्रचार में CM योगी ने खर्च किए 10 करोड़ रुपए। काश! इसमें का थोड़ा हिस्सा अगर ऑक्सीजन खरीदने में लग जाता तो कितना अच्छा होता !!🙏
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💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐 जिंदगी चाहे एक दिन की हो, चाहे चार दिन की की हो, उसे एेसे जियो जैसे कि जिन्दगी आपको नहीं मिली है,जिंदगी को आप मिले हो ! 💐☘🌻💐☘🌻💐☘🌻💐
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*॥🌹॥ भिखारी और भाग्य ॥🌹॥* एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है। पूर्णिमा का दिन था। भिखारी सोच रहा था कि आज अगर ईश्वर की कृपा होगी तो मेरी यह झोली शाम से पहले ही भर जाएगी। अचानक सामने से राजपथ पर उसी देश के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी। भिखारी खुश हो गया। उसने सोचा कि राजा के दर्शन और उनसे मिलने वाले दान से आज तो उसकी सारी दरिद्रता दूर हो जाएंगी और उसका जीवन संवर जाएगा। जैसे-जैसे राजा की सवारी निकट आती गई, भिखारी की कल्पना और उत्तेजना भी बढ़ती गई। जैसे ही राजा का रथ भिखारी के निकट आया, राजा ने अपना रथ रूकवाया और उतर कर उसके निकट पहुंचे। भिखारी की तो मानो सांसें ही रूकने लगीं, लेकिन राजा ने उसे कुछ देने के बदले उल्टे अपनी बहुमूल्य चादर उसके सामने फैला दी और उससे भीख की याचना करने लगा। भिखारी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। अभी वह सोच ही रहा था कि राजा ने पुनः याचना की। भिखारी ने अपनी झोली में हाथ डाला मगर हमेशा दूसरों से लेने वाला मन देने को राजी नहीं हो रहा था। जैसे-तैसे करके उसने दो दाने जौ के निकाले और राजा की चादर में डाल दिए। उस दिन हालांकि भिखारी को अधिक भीख मिली, लेकिन अपनी झोली में से दो दाने जौ के देने का मलाल उसे सारा दिन रहा। शाम को जब उसने अपनी झोली पलटी तो उसके आश्चर्य की सीमा न रही। जो जौ वह अपने साथ झोली में ले गया था, उसके दो दाने सोने के हो गए थे। अब उसे समझ में आया कि यह दान की महिमा के कारण ही हुआ। वह पछताया कि – काश! उस समय उसने राजा को और अधिक जौ दिए होते लेकिन दे नहीं सका, क्योंकि उसकी देने की आदत जो नहीं थी। _#बहनों और भाइयों, ठीक इसी प्रकार से वर्तमान समय स्वयं परमात्मा इस सृष्टि को स्वर्गिक बनाने का कार्य कर रहे हैं । जिसने भी इस ईश्वरीय कार्य में जितना सहयोग की जौ लगाई तो वह सहयोग देना नहीं बल्कि भविष्य के लिए स्वर्णिम जौ अर्थात स्वर्णिम दुनिया का भाग्य प्राप्त कर लेना है । इन विनाशी, कौड़ी तुल्य भौतिक पदार्थों को, जो कि हम चाहें या ना चाहें हमसे एक दिन छूट ही जाने हैं, तो क्यों न इन छूट ही जाने वाले भौतिक पदार्थों को ईश्वरीय कार्य के निमित्त सफल कर लेवें ।_ _*जो संस्कारवश परमात्मा के कार्य में सहयोग करने में कंजूसी करते हैं वे भाग्य बंटने के समय कम भाग्य मिलने पर पछताते हैं और सोचते हैं कि काश हमने थोड़ा और सफल कर लिया होता !!!*
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🍀🌻🌹🍀🌻🌹🍀🌻🌹🍀 सतसंग करो अगर वो ना कर सको तो कुसंग तो कभी नहीं करना चाहिए | इसलिए कहते है़ं कि संग तारे,कुसंग डुबोये!! 🍀🌻🌹🍀🌻🌹🍀🌻🌹🍀
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